rubina menon 1993 blast

1993 मुंबई बम ब्लास्ट की दोषी रुबीना मेनन को कोर्ट से झटका, लौटाई रिहाई की याचिका

Posted on Posted in Politics, Social Issues
8:54 pm
बंबई हाईकोर्ट ने 1993 के मुंबई श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोट की दोषी रबीना सुलेमान मेमन की फरलो पर रिहा करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
 
न्यायमूर्ति वी के तहिलरमानी और न्यायमूर्ति ए एम बदर की पीठ ने एक हालिया फैसले में कहा, हम याचिकाकर्ता (रबीना) को फरलो पर रिहा करने के पक्ष में नहीं हैं क्योंकि उसे टाडा अदालत ने आतंकी गतिविधियों में संलिप्त रहने के मामले में दोषी करार दिया है।
 
 
rubina menon 1993 mumbai blast
 
 
रबीना मार्च, 1993 में शहर को दहला देने वाले सिलसिलेवार बम विस्फोटों के एक प्रमुख साजिशकर्ता टाइगर मेमन की रिश्तेदार है। समझा जाता है कि टाइगर मेमन पाकिस्तान में रहता है। उन बम विस्फोटों में 257 लोगों की जान चली गयी थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हो गये थे।
 
मुंबई की एक टाडा अदालत ने 2006 में रबीना को तीन अन्य परिजनों के साथ उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वहीं उसके पति सुलेमान को सबूतों के अभाव में छोड़ दिया गया। रबीना के रिश्तेदार याकूब को आतंक के आरोपों में फांसी दी गयी थी।
 
पुणे की यरवदा जेल में बंद रबीना ने 22 जनवरी, 2015 को फरलो की छुटि्टयों के लिए जेल के अधिकारियों को आवेदन किया था। हालांकि उसकी याचिका को 15 जनवरी, 2016 को खारिज कर दिया गया। इससे असंतुष्ट होकर उसने अपील दाखिल की जिसे इस साल मई में खारिज कर दिया गया।
 
उसके बाद उसने हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर फरलो छुटि्टयां मांगी, जिसे पिछले सप्ताह खारिज कर दिया गया।
 
रबीना की वकील फरहाना शाह ने दलील दी कि इसी मामले में टाडा के तहत दोषी करार दिये गये तीन अन्य सह—आरोपियों को अस्थाई छुट्टी फरलो पर रिहा कर दिया गया। 
 
फरहाना ने बताया कि इनमें सरदार शाहवली खान, जिसे नौ जून, 2014 को फरलो पर रिहा किया, नासिर अब्दुल कादर, जिसे 27 जून, 2014 को फरलो पर रिहा किया गया और इसा अब्दुल रजाक मेमन, जिसे 10 जून, 2016 को फरलो पर रिहा किया गया, हैं।
 
फरहाना की दलील थी कि जब 1993 के बम विस्फोट मामले में रबीना के साथ उसी तरह से सह—आरोपी बनाये गये तीनों लोगों को फरलो छुट्टी दी गयी तो याचिकाकर्ता को भी यही सुविधा यानी फरलो पर छुटि्टयां मिलनी चाहिए।
 
अतिरिक्त सरकारी अभियोजक एच जे डेडिया ने कहा कि फरलो की रबीना की अर्जी को कारावास (बंबई फरलो और पेरोल) नियम, 1959 के नियम 4 (4) के तहत खारिज कर दिया गया।
 
इस खबर से निश्चित रूप से 1993 बम ब्लास्ट के पीड़ितों को थोड़ी राहत मिली होगी।

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