केजरीवाल का विज्ञापन खर्च आम नहीं ख़ास है.

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फ़र्ज़ कीजिये आप तमिलनाडु या केरल के किसी गाँव में है और अखबार पढ़ रहे हैं. तभी आपको एक पूरा पन्ना अरविन्द केजरीवाल का विज्ञापन देखने को मिलता है. आपकी प्रतिक्रिया क्या होगी? आपको कुछ समझ नहीं आएगा की आखिर उस विज्ञापन का मतलब क्या है. तमिलनाडु या केरल के लोगों को आखिर क्या लेना देना की केजरीवाल सरकार दिल्ली की स्कूलों में क्या करती है. दूर दूर तक कोई कनेक्शन नहीं है. जो समस्याएं दिल्ली की हैं वो जरुरी नहीं हर जगह हों.

खैर, दिल्ली सरकार (अरविन्द केजरीवाल) तो ऐसे ही काम करती है. आप सरकार का विज्ञापन खर्च जोकि 2013-14 में 25 करोड़ रुपए था, जोके 2014-15 में 81 करोड़ हो गया. CAG रिपोर्ट के मुताबिक इस साल यह खर्च 115 करोड़ तक जा सकता है. शायद बहुत से लोग नहीं जानते होंगे की आप सरकार ने जब बजट पेश किया था तब 500 करोड़ का बजट रखा गया था विज्ञापन का. बाद में उसे घटाकर 100 करोड़ कर दिया गया. प्रिंट मीडिया का कुल विज्ञापन खर्चे का 84 % अन्य राज्यो में विज्ञापन देने में खर्च हुआ.

 

Arvind-Kejriwal-Ads

 

कहने को तो केजरीवाल जी के पास चुनाव लड़ने के पैसे नहीं हैं मगर अन्य राज्यो के अखबारों के पन्ने इनके विज्ञापनों से जरूर भरे हुए मिलेंगे. मगर उनका बाहर के राज्यो में किया हुआ खर्च आप आदमी के समझ से पर है.

 

 

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