राफेल डील पक्की. पर्रिकर और मोदी ने बचाये 56000 करोड़ रुपए

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मोदी सरकार ने बुधवार को फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी। फ्रांस के डिफेंस मिनिस्टर जीन वेस ली ड्रायन की मौजूदगी में शुक्रवार को दोनों देश इस बहु प्रतीक्षित पर डील पर साइन कर सकते हैं। भारत को 7.878 बिलियन यूरो (करीब 59 हजार करोड़ रुपए) खर्च करने होंगे 36 राफेल के लिए ।

रक्षा सूत्रों ने बताया कि विमान के लिए है कि सौदा 20 साल में पहली लड़ाकू जेट सौदा है. यह सौदा पहले कांग्रेस सरकार करना चाहती थी जिसे मोदी सरकार ने आते ही रद्द कर दिया और नए सिरे से बातचीत सुरु की. रक्षा मंत्री ने बहुत ही कड़ा रुख अपनाते हुए कांग्रेस द्वारा तय राशि से 56000 करोड़ रुपए काम में यह सौदा तय किया.

 

rafale comparison with pakistan china

 

इस डील में एक और खास बात यह है की जितनी भी राशि भारत सरकार फ्रांस को देगी लड़ाकू विमान के लिए, उसमे से 50% राशि को फ्रांस को भारत में निवेश करना होगा. यानि की करीब 23000 करोड़ रुपए फ्रांस भारत में निवेश करेगी जिससे बड़ी और चोटी दोनों कम्पनीज को बहुत फायदा होगा और हजारों नयी नौकरियां भी मिलेंगी. 

फ़िलहाल भारतीय वायुसेना को फाइटर्स प्लेन की सख्त जरूरत है। आखिरी बार वायुसेना को 1996 में रूस से सुखोई 30 एमकेआई मिले थे। पुराने हो चुके मिग-21 और मिग-27 विमान बेड़े से हटाए जा रहे हैं।

 

यह सब संभव हो पाया मनोहर पर्रिकर के लगातार दबाव बनाने से और मोदी जी की विदेश नीतियों के चलते. वरना कांग्रेस तो इसी के लिए काफी ज्यादा रकम देने के लिए तैयार थी.

जानिए आखिर क्यों हैं राफेल लड़ाकू विमान स्पेशल

राफेल को फ्रांस की Dassault Aviation बनाती है। राफेल का फ्रेंच में मतलब होता है तूफान। राफेल 2 इंजन वाला मल्टीरोल फाइटर एयरक्राफ्ट है। यह विमान स्पीड 2250-2500 किमी प्रति घंटे तक की रफ़्तार से उड़ान भर सकता है । फ्यूल कैपेसिटी 4700 किग्रा की है । एयरबेस के साथ एयरक्राफ्ट कैरियर से भी उड़ान भर सकता है। ब्रह्मोस जैसी 6 एटमी हथियार वाली मिसाइल ढोने की काबिलियत।

इन सबके बावजूद भी लाल सलाम करने वाले लोग आर्मी को गाली देने से नहीं चूकेंगे देखिये ये विडियो और खुद सोचिये