कश्मीरी पंडितों के लिए खुशखबरी! मोदी ने जो कहा वो करके दिखाया!

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जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने गुरुवार को एक रेजोल्यूशन पास किया। इसमें कश्मीरी पंडित और दूसरे माइग्रेंट्स की वापसी की बात कही गई है। रेजोल्यूशन में कहा गया है कि लोगों की घाटी में वापसी हो, इसके लिए हम बेहतर माहौल तैयार करेंगे। बता दें कि कश्मीरी पंडितों के घाटी से बाहर गए 27 साल हो चुके हैं।
 
 
गुरुवार को असेंबली में आते ही नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा, ‘कश्मीरी पंडितों और घाटी से बाहर गए दूसरे माइग्रेंट्स की वापसी के लिए एक रेजोल्यूशन पास किया जाना चाहिए।’
उमर के मुताबिक, ‘जो 27 साल पहले हुआ, वो दुर्भाग्यपूर्ण था। कश्मीरी पंडितों, सिखों और कुछ मुस्लिम समुदाय के लोगों को मजबूर होकर कश्मीर से जाना पड़ा।’
राज्य के संसदीय कार्य मंत्री अब्दुल रहमान वीरी ने रेजोल्यूशन को सदन में रखा। इसे ध्वनि मत से पास कर दिया गया।
 
जम्मू-कश्मीर के एजुकेशन मिनिस्टर नईम अख्तर के मुताबिक, ‘आज पंडितों को कश्मीर की इतनी जरूरत नहीं है, जितनी की कश्मीर को उनकी है।’
‘आज कश्मीर को कई नस्ल और संस्कृति वाला राज्य बनाने की जरूरत है। एक ऐसा राज्य जिसका कॉस्मोपॉलिटन कैरेक्टर हो।’
 
कश्मीरी पंडितों के घाटी से पलायन (माइग्रेशन) की 27th एनीवर्सरी पर अनुपम खेर ने अपने ट्विटर अकाउंट में गुरुवार को एक वीडियो पोस्ट किया। जिसमें वे एक कविता पढ़ते दिख रहे हैं। 
उन्होंने यह कविता ‘फैलेगा हमारा मौन’ टाइटल से कश्मीरी पंडितों को डेडिकेट की है। 
इसके साथ ही खेर ने एक कमेंट भी किया है, “27 साल बाद भी हम कश्मीरी पंडित अपने देश में रिफ्यूजी हैं। उनके शांत चीत्कार पर एक कविता, शेयर करें।” 
अनुपम खेर खुद भी कश्मीरी पंडित हैं। उन्होंने जो वीडियो पोस्ट किया है, उसे फिल्ममेकर और सोशल एक्टिविस्ट अशोक पंडित ने डायरेक्ट किया है।
खेर वीडियो में कहते हैं, “कश्मीरी पंडित चुप रहने को मजबूर हैं, लेकिन अब वे और खामोश नहीं रहेंगे।” 
 
बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने कश्मीरी पंडितों के पलायन के 27 साल पूरे होने पर एक कविता गाकर चेतावनी दी है। अनुपम खेर ने ‘फैलेगा-फैलेगा हमारा मौन’ नाम से कविता गाई है। कविता में उन्होंने कहा, ‘फैलेगा-फैलेगा हमारा मौन। समुद्र के पानी में नमक की तरह। नसों में दौड़ते रक्त में घुलता हुआ पहुंचेगा दिल की धड़कनों के बहुत समीप। हमारे मौन के धमाके से बड़ा उस वक्त के कोई धमाका नहीं होगा।’ इस कविता को मशहूर कश्मीरी कवि डॉ शशि शेखर तोशखानी ने लिखा है।
 
वीडियो को ट्वीट करते हुए अनुपम खेर ने लिखा है, ’27 साल गुजर जाने के बाद भी हम कश्मीरी पंडित अपने ही देश में अभी भी शरणार्थी हैं। यह कविता उनके खामोश विरोध की प्रतीक है।’ साथ ही न्यूज एजेंसी एएनआई से खेर ने कहा, ’27 साल बीत जाने के बाद भी किसी ने हथियार नहीं उठाए, क्योंकि हम लोग शांति और हमारे देश की महानता में विश्वास रखते हैं।
 
कोई भी कश्मीरी पंडित नहीं भूल सकता कि 19 जनवरी 1990 को क्या हुआ था। मस्जिदों से घोषणा हो रहा थी और कश्मीरी पंडितों से अपना घर छोड़कर चले जाने के लिए कहा जा रहा था।’ बता दें, अनुपम खेर खुद एक कश्मीरी पंडित हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक लोग शांत थे, लेकिन अब वे शांत नहीं रहेंगे। साथ ही कहा कि कश्मीरी पंडितों का भविष्य अंधेरे में है।