ममता बनर्जी का फिर फूटा भांडा, ज़ी न्यूज़ के रिपोर्टर पर करवाई FIR

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ममता बनर्जी और उनकी सरकार का एक काला चेहरा फिर से बेनकाब हुआ है।आपको याद होगा की पिछले कुछ समय से हावड़ा में हिन्दू विरोधी दंगे हुए थे।इस खबर की रिपोर्टिंग किसी भी न्यूज़ चैनल ने नही की थी,सिवाय ज़ी न्यूज़ के,और इस चीज़ की खीझ ममता बनर्जी ने ज़ी न्यूज़ के एडिटर इन चीफ सुधीर चौधरी के खिलाफ FIR करवा कर निकाली है।गौरतलब है कि पिछले कुछ हफ्तों में बंगाल के हावड़ा में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में ज़ी न्यूज़ के अलावा किसी भी राष्ट्रिय समाचार चैनल ने उसकी रिपोर्टिंग नही की थी।TMC के नेताओं की नकारगी और ममता बनर्जी सरकार और खुद ममता बनर्जी की नकारगी का सबूत देने वाले चैनल के संपादक पर ममता बनर्जी के द्वारा करवाई गई FIR उनकी खीझ और गुस्से का प्रतीक है।
 
ज़ी न्यूज़ के संपादक सुधीर चौधरी ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि उनके और उनकी सहयोगी पूजा जिन्होंने हावड़ा में इस वारदात की कवरेज की थी,के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है।
सुधीर चौधरी ने अपने फेसबुक वाल पर लिखा,
 
“Just to inform all of you Mamta Banerjee Govt has filed an FIR against me and ZeeNews reporter Pooja Mehta and cameraperson Tanmay Mukherjee for covering Dhulagarh Riots on Zee News.The FIR has non bailable sections which is enough to gauge their intentions to arrest me and my colleagues. It’s another low point in our democracy to see a democratically elected govt using police force to curb media in an effort to suppress uncomfortable facts and reality.When you can’t manage media,use the state machinery to conquer the media only to conceal the failures of your administration.It shows the intolerance of a chief minister who is using the state machinery as her personal fiefdom and acting like a feudal lord. I see the positive side of this blunder as a window for all free minds of this nation to act and show fascist forces their actual place. Or once again Selfish Politics will prevail? That’s my fear.#IntolerantMamta”
 
 
ZEE News FIR Mamta
 
 
बंगलादेशी मुसलमानों और बंगलादेशी घुसपैठियों से ममता बनर्जी के प्रेम का पर्दाफाश एकबार फिर से हो गया है।
देश के खिलाफ हर साज़िश में ममता बनर्जी प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से साझेदार रही हैं और उनकी इस खीझ को देखकर लगता है कि उनकी कालेधन वाली पेमेंट अबतक पहुँची नही।
 
शर्मनाक बात तो ये है कि मीडिया की स्वतंत्रता पर छाती ठोकने वाले अब खुद ही मीडिया का गला घोंट रहे हैं।
 
ये ‘सुविधा की राजनीती’ सच में बहुत घातक होती जा रही है।