आखिर क्यों बोलते हैं नमस्ते और क्या महत्व है इसका ?

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मित्रों, हम में से अधिकतर हिन्दू लोग जब किसी से मिलते हैं तो “नमस्ते ” या ” नमस्कार ” कर के एक दुसरे का अभिवादन करते हैं, अधिकतर लोगो को ये पता ही नहीं होता की वो नमस्ते क्यूँ करते हैं और इसका क्या अर्थ होता है। मैं अमेरिका के कई शहरों में गयी और अक्सर मुझे अमेरिकन नमस्ते करते हैं और जब मैं उनसे पूछता हूँ की “क्या आपको इसका मतलब मालूम है ?” ज्यादातर लोग इसका विस्तार पूर्वक जवाब देते हैं| मगर हमारे अपने देश में ही बहुत लोगों को इसका मतलब नहीं मालूम।

 

संस्कृत में नमस्ते को विच्छेद करे तो हम पाएंगे की नमस्ते दो शब्दों से बना है – नमः + असते

 

नमः का मतलब होता है झुकना और असते का मतलब सर, यानि मैं आपके सम्मुख झुक गया । यहाँ गौर करने वाली बात यह है की नमः शब्द का प्रयोग भगवान् के लिए भी किया जाता है. इसका मतलब आप जितना सम्मान दूसरों को देंगे उतना ही सम्मान आप भगवान को दे रहे हैं.

आध्यात्म की दृष्टी से इसमें मनुष्य दुसरे मनुष्य के सामने अपने अंहकार को कम कर रहा है। नमस्ते करते समय में दोनों हाथो को जोड़ कर एक कर दिया जाता है जिसका अर्थ है की इस अभिवादन के बाद दोनों व्यक्ति के दिमाग मिल गए या एक दिशा में हो गये।

 

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