हाई कोर्ट से बेज़्ज़त होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रशांत भूषण और राहुल गांधी के मूँह पर मारा तमाचा!

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सहारा-बिड़ला डायरी मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार दिनांक 11 जनवरी सन 2017 को पेश सामग्री को नाकाफी बताते हुए जांच की याचिका खारिज कर दी।
 
सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री को कार्पोरेट हाउसेज की ओर से घूस दिए जाने का कोई सबूत नहीं है।
 
Birla-Sahara diaries case:AG Mukul Rohatgi reprsnting govt told SC there’s no evidence to prove frmr Gujarat CM ws paid by corporate houses
 
— ANI (@ANI_news) January 11, 2017
 
बता दें कि सहारा-बिड़ला डायरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता ‘कॉमन कॉज’ के वकील प्रशांत भूषण को पुख्ता सबूतों के साथ आने का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता ने एक कथित डायरी का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए कंपनियों से करोड़ों रुपये का घूस लेने का आरोप लगाया है।
 
सुप्रीम कोर्ट ने जवाब दिया कि उसे आयोग पर समझौते का शक नहीं है लेकिन ऐसे डायरी की अखंडता की जांच होनी चाहिए। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की तरफ से रखे तथ्यों को जांच का आदेश देने के लिए नाकाफी करार दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अगर याचिकाकर्ता ठोस सबूत नहीं दे सका तो मामले को ख़ारिज कर दिया जाएगा।
 
प्रधानमंत्री जैसे बड़े संविधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ इस तरह से जांच का आदेश नहीं दिया जा सकता। गौरतलब है कि इनकम टैक्स की एक रेड में सहारा के ऑफिस से एक डायरी मिली थी, जिसमे कथित रूप से यह लिखा है की 2003 में गुजरात के मुख्यमंत्री को 25 करोड़ रुपये घूस दी गई। उस समय नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। इनके अलावा तीन और मुख्यमंत्रियों को भी घूस दी गई।
 
गौरतलब है कि इनकम टैक्स की एक रेड में सहारा के ऑफिस से एक डायरी मिली थी, जिसमे कथित रूप से यह लिखा है की 2003 में गुजरात के मुख्यमंत्री को 25 करोड़ रुपये घूस दी गई। उस समय नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। इनके अलावा तीन और मुख्यमंत्रियों को भी घूस दी गई।