राजनीति में लौह पुरुष जैसा सरदार नहीं मिलता…!!

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इस कविता के माध्यम से देश में चल रहे गन्दी राजनीति को दिखाने की कोशिश की है~~~ यह कविता आपके दिल को झकझोर देगी~~~ जब धरती के दामन पर हों दाग लहू की होली के...., कोई कैसे गीत सुना दे बिंदिया कुमकुम रोली के...., मैं झोंपडियों का चारण हूँ आस उगाने आया हूँ..., घायल भारत…